Friday, July 1, 2022

श्री रामायण आरती

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॥ श्री रामायणजी की आरती ॥

आरती श्री रामायण जी की।कीरति कलित ललित सिया-पी की॥

गावत ब्राह्मादिक मुनि नारद।बालमीक विज्ञान विशारद।

शुक सनकादि शेष अरु शारद।बरनि पवनसुत कीरति नीकी॥

आरती श्री रामायण जी की।

कीरति कलित ललित सिया-पी की॥

गावत वेद पुरान अष्टदस।छओं शास्त्र सब ग्रन्थन को रस।

मुनि-मन धन सन्तन को सरबस।सार अंश सम्मत सबही की॥

आरती श्री रामायण जी की।

कीरति कलित ललित सिया-पी की॥

गावत सन्तत शम्भू भवानी।अरु घट सम्भव मुनि विज्ञानी।

व्यास आदि कविबर्ज बखानी।कागभुषुण्डि गरुड़ के ही की॥

आरती श्री रामायण जी की।

कीरति कलित ललित सिया-पी की॥

कलिमल हरनि विषय रस फीकी।सुभग सिंगार मुक्ति जुबती की।

दलन रोग भव मूरि अमी की।तात मात सब विधि तुलसी की॥

आरती श्री रामायण जी की।

कीरति कलित ललित सिया-पी की॥

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